मुजफ्फरनगर : पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाया गया एक लाख का इनामी साथी संग मुठभेड़ में ढेर

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सोमवार सुबह मुजफ्फरनगर पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली। पुलिस मुठभेड़ में दो बदमाश ढेर हो गए। इनमें एक बदमाश पर एक लाख रुपये तो दूसरे बदमाश पर 50 हजार का इनाम घोषित था। मुठभेड़ में एक दरोगा और सिपाही भी घायल हुए हैं। मारे गए एक लाख रुपये के इनामी बदमाश को गत दो जुलाई को उसके साथियों ने पुलिस पर हमला कर छुड़ा लिया था। इस हमले में एक दरोगा को गोली मारी गई थी।

एडीजी जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि रात मैं जोनल नाइट चैकिंग पर था और सुबह लगभग 04:00 बजे मुजफ्फरनगर शहर के इलाके में पहुंचा। थोड़ी देर बाद एसएसपी अभिषेक और एसपी सिटी सतपाल अंतिल ने भी मेरे आने की जानकारी ली। हम एक सड़क किनारे ढाबे पर चाय पी रहे थे। लगभग 04: 30 बजे सिटी कंट्रोल के माध्यम से एक खबर चलाई गई कि भोपा रोड पर चैकिंग के दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार 4 लोगों ने पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की।

गांधीनगर चौकी प्रभारी अजय कुमार, एसएचओ संतोष कुमार सिंह, क्राइम ब्रांच टीम ने बदमाशों की घेराबंदी शुरू कर दी। हम भी तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और पाया कि पुलिस पार्टी अपराधियों को काबू करने में लगी हुई है। हम तीनों ने पुलिस पार्टी को कवर सपोर्ट  फायर प्रदान किया। थोड़ी देर बाद, दूसरे छोर से गोलीबारी बंद हो गई। जांच करने पर दो अपराधी गोली लगने के पाए गए। उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया। रास्ते में उन्होंने रोहित संधू उर्फ रोहित साडू निवासी मुजफ्फरनगर और राकेश यादव निवासी अयोध्या के रूप में अपनी पहचान बताई। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।

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एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि दोनों लंबे आपराधिक इतिहास वाले कुख्यात अपराधी हैं। रोहित साडू 2 जुलाई’19 को पुलिस हिरासत से भाग गया था, जब उसके दोस्तों ने पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की, जिसमें मिर्जापुर का एक एसआई दुर्ग विजय सिंह घायल हो गया, जिसने बाद में 9 जुलाई को दम तोड़ दिया था। इस घटना में लिप्त कुछ बदमाश पकड़े गए थे मगर रोहित साडू और राकेश यादव फरार चल रहे थी। पुलिस इनकी तलाश में थी। दोनों आरोपियों पर पुलिस हिरासत से भागने और हत्या के एक ही मामले में क्रमशः एक लाख और 50,000 रुपये का इनाम घोषित था।

उनके पास से एक मोटरसाइकिल और दो पिस्तौल बरामद किए गए। इनमें एक 9एमएम की पिस्टल है। बदमाशों के दो साथी मेरठ की ओर भाग गए। इस प्रकरण की पूरी जाँच की जा रही है। एक एसआई अजय कुमार और एसओजी के एक कांस्टेबल विनीत कपासिया को भी गोली लगी है। और अस्पताल में भर्ती कराया। वे खतरे से बाहर हैं।

रोहित पर 40 से ज्यादा संगीन अपराध की धाराओं में मुकदमा दर्ज हैं। 2 जुलाई को बदमाशों ने पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्ची पाउडर फेंककर और  ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए पेशी पर आए कुख्यात अपराधी रोहित को छुड़ा कर ले गए थे।  बदमाशों द्वारा की गई फायरिंग में सब इंस्पेक्टर दुर्ग विजय सिंह गोली लगने से घायल हो गए थे।

जानसठ कोतवाली क्षेत्र के गांव सालारपुर में एक होटल पर पुलिसकर्मी भोजन कर रहे थे, तभी कार सवार चार पांच बदमाश पहुंचे और पुलिसकर्मियों के आंखों में मिर्ची पाउडर डाल दिया और फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाब में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, लेकिन वे अपराधी रोहित को अपने साथ ले जाने में सफल हो गए थे।

मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव जोहरा निवासी रोहित रंगदारी समेत कई संगीन मामलों में करीब एक साल से मिर्जापुर जेल में बंद था। हत्या के प्रयास के एक मुक़दमे में मंगलवार को सुनवाई होने पर मिर्जापुर सब इंस्पेक्टर विजय सिंह साथी पुलिसकर्मियों के साथ उसे वज्र वाहन से लेकर पहुंचे थे। एडीजे-11 कोर्ट में पेशी के बाद मिर्जापुर लौटते समय दोपहर दो बजे पुलिसकर्मी भोजन करने के लिए एक होटल पर रुके थे, यहीं पर बदमाशों ने धावा बोलकर रोहित को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ा लिया था।

 

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