नोएडा अथॉरिटी के पूर्व DSP पर केस दर्ज, यादव सिंह से भी दोगुनी ज्यादा संपत्ति

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नोएडा प्राधिकरण में तैनात रहे पूर्व डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के खिलाफ आय से 12 गुना (1178 प्रतिशत) ज्यादा संपत्ति होने पर शनिवार को सेक्टर-49 थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। एंटी करप्शन ब्रांच मेरठ ने 14 साल के कार्यकाल में आय और संपत्ति की जांच के बाद यह कार्रवाई की है।

हर्षवर्धन भदौरिया यूपी पुलिस में मई 1981 में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुआ था। वर्ष 2003 तक वह अलग-अलग कई जिलों में तैनात रहा। 2003 में नोएडा प्राधिकरण में उसकी तैनाती हुई। यहां नौकरी के दौरान भदौरिया की संपत्ति में तेजी से इजाफा हुआ। शिकायत के बाद एंटी करप्शन ब्रांच मेरठ ने भदौरिया की संपत्ति की जांच शुरू कर दी। प्राथमिक जांच में पता चला है कि 1 जनवरी 2003 से 29 मई 2017 तक पूर्व डीएसपी के वेतन से कुल शुद्ध आय 83 लाख रुपए था, जबकि इस अवधि में पूर्व डीएसपी ने संपत्ति खरीदने पर करीब 10 करोड़ 63 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए। आरोपी की आय से 12 गुना ज्यादा संपत्ति में इजाफा हुआ।

यादव सिंह से भी ज्यादा संपत्ति : एंटी करप्शन ब्रांच को भदौरिया की कई अन्य स्थानों पर बेनामी संपत्ति होने की आशंका है। अफसर इसकी जांच कर रहे हैं। पूर्व डीएसपी की संपत्ति नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह से भी दोगुनी से ज्यादा है। 954 करोड़ रुपए के घोटाले में जेल में बंद पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के खिलाफ आय से अधिक 512 फीसदी ज्यादा संपत्ति निकली थी। वहीं हर्षवर्धन भदौरिया के पास 1178 फीसदी ज्यादा संपत्ति होने का पता चला है। बता दें कि पूर्व डीएसपी ने 2017 में रिटायरमेंट से पहले ही वीआरएस ले लिया था।

रिटायरमेंट से 4 महीने पहले दिया इस्तीफा

जानकारी के अनुसार, पूर्व डीएसपी का प्राधिकरण में ऐसा रसूख था कि कोई भी अधिकारी इसके फैसले के खिलाफ नहीं जा सकता था। जब राज्य में सपा सरकार बदल गई तो उसके ऊपर कार्रवाई के बादल मंडराने लगे। लिहाजा उसने रिटायरमेंट से 4 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया था। मगर इसे तुरंत मंजूर नहीं किया गया था।

एक प्राइवेट स्कूल सहित कई संपत्तियां 

पूर्व डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया की सेक्टर-47 में आलीशान कोठी है। इसे मिनी ताजमहल की तर्ज पर बनावाया गया है। इसमें 24 घंटे प्राइवेट सुरक्षा गार्डों की तैनाती रहती है। कोठी की देखभाल में 15 से ज्यादा कर्मचारी लगे हुए हैं। इसके अलावा भी नोएडा के कई इलाकों में भी संपत्ति है। एक प्राइवेट स्कूल भी चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नोएडा के विभिन्न इलाकों में अब भी पूर्व डीएसपी की कई दुकानें चल रहीं हैं जिसका लाखों रुपए में किराया मिलता है।

1999 में प्रधिकरण से प्लॉट आवंटित हुआ था, जिसकी कीमत दस लाख थी। पांच साल में इसे चुकाना था। घर बनाने के लिए बैंक से 48 लाख का लोन लिया था। मगर एंटी करप्शन ब्रांच उस समय की कीमत को वर्तमान के अनुसार दर्शा रही है। उस समय से करीब 20 गुना से अधिक वर्तमान में संपत्ति की कीमत बढ़ गई है। मेरे पास संपत्ति और लोन के तमाम दस्तावेज हैं।” -हर्षवर्धन भदौरिया, पूर्व डीएसपी, नोएडा प्राधिकरण

नोएडा में भदौरिया की आलीशान कोठी

नोएडा (व.सं.) । नोएडा प्राधिकरण के जिस पूर्व डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के खिलाफ आय से 12 गुना ज्यादा संपत्ति होने का मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसके पास सेक्टर-47 में आलीशान कोठी है। यह कोठी मिनी ताजमहल की तर्ज पर बनी है। व्हाइट और गोल्डन पेंट से चमचमाती यह कोठी सोने जैसा दिखता है। कोठी के सामने बूथ बना है। यहां प्राइवेट सुरक्षाकर्मी हर समय तैनात रहते है। बिशनपुरा में उनका एक स्कूल भी चलता है।

वहीं, प्राधिकरण के पूर्व डीएसपी के कार्यकाल के दौरान पार्किंग से संबंधित कई शिकायत मिली थी। लिहाजा प्राधिकरण ने नई प्राधिकरण नीति बनाई। जिसमें विभिन्न सर्किल के अनुसार पार्किंग के लिए अधिकारी नियुक्त किए गए। जबकि पहले पूरे शहर की पार्किंग की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी के पास थी। जिससे गड़बड़ी की आशंका अधिक थी। प्राधिकरण के पूर्व डीएसपी हर्षवर्धन भदौरिया के कार्यकाल के दौरान 50 स्थानों पर वैध पार्किंग थी। यह पार्किंग और सामानों के खरीद के प्रमुख थे। इन पार्किंग के अलावा कई अवैध पार्किंग होने की शिकायत भी प्राधिकरण को मिली थी। वर्ष 2017 के बाद प्राधिकरण को नई पार्किंग नीति बनानी पड़ी। जिसके तहत 100 वैध पार्किंग स्थल बनाए गए और सार्वजनिक रूप से उसकी सूची जारी की गई। भदौरिया को प्रदेश के एक बड़े नेता का करीबी भी माना जाता है। यही कारण था कि एक विशेष ओहदा रखते था। दो जनवरी 2017 को उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन किया और इसी वर्ष 30 अप्रैल को वह सेवानिवृत हुआ।

हरियाणा का रिश्तेदार भी करोड़ों का मालिक

नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान हर्षवर्धन भदौरिया ने कई रिश्तेदारों को भी काम दिया। उन्हें विभिन्न पार्किंग सौंपने आदि के काम में लगाया जाता था। बताया जाता है कि इसी कारण अवैध पार्किंग चलाने का काम तेजी से फैला। उनका एक रिश्तेदार हरियाणा के फरीदाबाद का रहने वाला है। शहर के तमाम सेक्टरों में अवैध पार्किंग को लेकर कई बार केस भी दर्ज हुए थे।


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