RTI में हुआ खुलासा, 2 रुपये में DU की कॉपी का पहला पन्ना चेक कर सकेंगे स्टूडेंट

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देशभर के छात्रों के लिए अच्छी खबर है। छात्र अब दो रुपये खर्च कर अपने कुल अंकों की जांच कर सकते हैं। केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है। आयोग ने कहा है कि अगर छात्र सूचना के अधिकार के तहत उत्तर-पुस्तिका का पहला पेज जांचना चाहता है तो विश्वविद्यालय इससे इंकार नहीं कर सकता और ना ही उसे पूरी उत्तर-पुस्तिका की जांच के लिए राशि भुगतान के लिए मजबूर कर सकता है। सीआईसी के इस आदेश के बाद देशभर के लाखों छात्रों को लाभ मिलेगा।

केन्द्रीय सूचना आयोग की सूचना आयुक्त वनजा एन सरना ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र की याचिका पर यह निर्णय दिया है। आयोग ने डीयू समेत तमाम संस्थाओं को इस बाबत नियम में बदलाव का आदेश दिया है। आयोग का मानना है कि सभी विभाग सूचना के अधिकार के तहत एक ही नियम से बंधे हैं। सीआईसी ने डीयू की सूचना अधिकारी के उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि विश्वविद्यालय का यह अपना नियम है कि अगर कोई छात्र उत्तर-पुस्तिका जांचना चाहता है तो उसे पूरी उत्तर-पुस्तिका की जांच के लिए तय फीस का भुगतान करना होगा। आयोग ने कहा आरटीआई के तहत सभी विश्वविद्यालय और संगठनों पर एक ही नियम लागू होता है और वह इससे इंकार नहीं कर सकते।

एक छात्र की मेहनत से देशभर के छात्रों को सुविधा
दरअसल वर्ष 2016 में दिल्ली विश्वविद्यालय से वैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मॉस कम्युनिकेशन (बीजेएमसी) की पढ़ाई कर रहे एक छात्र की उत्तर-पुस्तिका की जांच के बाद खुलासा हुआ था कि परीक्षक की कुल अंकों में गलती की वजह से यह छात्र लगातार दो साल तक अनुर्तीण होता रहा था। इस छात्र ने अपनी उत्तर-पुस्तिका की जांच के बाद पाया परीक्षक ने प्रत्येक उत्तर पर अंक तो ठीक दिए हैं, लेकिन पहले पेज पर उनकी गणना गलत की है। इसकी वजह से वह अनुर्तीण हो रहा था।

इस छात्र की आपबीती जानने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी(कानून की पढ़ाई) कर रहे एक अन्य छात्र मोहित गुप्ता ने वर्ष 2017 में अपनी उत्तर-पुस्तिका के पहले पेज को जांचने के लिए आग्रह किया, तो विश्वविद्यालय ने उसे साढ़े सात सौ रुपये की फीस जमा कराने को कहा। मोहित गुप्ता ने अधिवक्ता नरविन्द्र ठकराल के माध्यम से इस मुद्दे को लेकर जनवरी 2018 में केन्द्रीय सूचना आयोग के समक्ष पहुंच गया। जहां अब यह पूरे देश के छात्रों के हक में यह फैसला हुआ है।

उत्तर-पुस्तिका में कुल अंक 30 की बजाय 15 दिए गए थे
इस मामले में बीजेएमसी के छात्र ने जांच के दौरान पाया कि उसने उत्तर-पुस्तिका में अलग-अलग उत्तर पर कुल 30 अंक दिए गए थे। लेकिन पहले पेज पर इनका कुल जोड़ महज 15 दिया गया था, जिसकी वजह परिणाम पत्र में उसे अनुर्तीण दिखाया गया था। हालांकि इस मसले को लेकर परीक्षक के खिलाफ कार्रवई की मांग भी की गई थी। परन्तु आयोग ने कहा कि यह विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला है, इस पर आयोग हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

अभी तक क्या था प्रावधान
दिल्ली विश्वविद्यालय में अभी तक अगर कोई छात्र अपनी उत्तर-पुस्तिका जांचना चाहता था, तो उसे साढ़े सात सौ रुपये की फीस का भुगतान करना पड़ता था। यदि वह छात्र सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रत्येक पेज के हिसाब से भुगतान की बात करता था तो उसकी अर्जी को खारिज कर दिया जाता था। परन्तु अब छात्र अगर उत्तर-पुस्तिका के पहले पृष्ठ को जांचना चाहेगा, तो वह सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दो रुपये का भुगतान कर ऐसा कर सकता है। हालांकि आयोग ने स्प्ष्ट किया है कि अगर छात्र पूरी उत्तर-पुस्तिका जांचना चाहेगा तो उसे विश्वविद्यालय द्वारा तय फीस का भुगतान करना पड़ेगा।


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